भीण्डर में भाजपा में फूट! | 12 पार्षद जीतने के बाद भी कांग्रेस का सहारा
कही विधायक उदय लाल की अलग खिचड़ी तो नही ?
उदयपर नगरीय निकाय चुनाव-2026 के तहत जिले की 6 नगर निकायों में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन का अंतिम दिन बुधवार को रहा। कुल 21 प्रत्याशियों ने पर्चे दाखिल किए, जिसमें भीण्डर में सर्वाधिक 6 नामांकन हुए। वहीं भीण्डर नगर पालिका से भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी की बड़ी खबर सामने आ रही है।

जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम उदयपुर में महापौर पद के लिए भाजपा से पारस सिंघवी और कांग्रेस से डॉ. पूनम राठौड़ ने नामांकन किया।
- मावली: कांग्रेस से पुष्पा कुमारी, भाजपा से राकेश कुमार मीणा
- भीण्डर: भाजपा से सुरेशकुमार जैन, मीना व गणेशलाल, कांग्रेस से सुंदरलाल व गोपाल, निर्दलीय चमनलाल
- वल्लभनगर: कांग्रेस से रामी व सोवनी, भाजपा से लीला भील व भोलीबाई भील
- फतहनगर-सनवाड़: कांग्रेस से सोसर, भाजपा से प्रियंका, सीमा व रमादेवी, निर्दलीय ममता
- कानोड़: कांग्रेस से रोनक स्वर्णकार, भाजपा से शिवकुमारी सोनी

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को संवीक्षा, 18 सितंबर को 3 बजे तक नाम वापसी, 21 सितंबर को सुबह 10 से 2 बजे तक मतदान और उसी दिन मतगणना होगी। उपाध्यक्ष का चुनाव 22 सितंबर को होगा।

भीण्डर में भाजपा की गुटबाजी बेनकाब
सूत्रों के अनुसार भीण्डर में भाजपा के 12 पार्षद जीतकर आए, बावजूद इसके अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को अपनी ही पार्टी का प्रस्तावक नहीं मिला और कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीते पार्षद को प्रस्तावक बनाना पड़ा। इससे साफ है कि अंदरूनी गुटबाजी ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है। सोशल मीडिया पर पूर्व विधायक रणधीर सिंह भींडर के साक्षात्कार में वर्तमान विधायक उदय लाल डांगी से तालमेल न बैठ पाने की बात सामने आई है। वहीं गणपत लाल मेनारिया और हिम्मत सिंह झाला जैसे वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार में नजर नहीं आए। दिखना यह होगा की आखिर अंदर परदे के पीछे कौनसी खिचड़ी पक रही है किसके इशारे पर कांग्रेस का जीता पार्षद प्रस्तावक बना कही प्रकार के सवाल आम लोगो के बीच निकल कर आ रहे है
अंदर की खिचड़ी क्या है? सूत्रों की मानें तो कांग्रेस की बाड़ाबंदी से निकलकर भाजपा के अध्यक्ष पद का प्रस्तावक बनना कोई साधारण घटना नहीं। चर्चा है कि इसके पीछे स्थानीय स्तर पर किसी बड़े नेता का इशारा तो नहीं? अपने ही जीते पार्षद को प्रस्तावक तक न बनने देना, क्या ये सिर्फ कुर्सी की लड़ाई है?

भीण्डर के सियासी गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद का भाजपा के अध्यक्ष पद का प्रस्तावक बनना और अपनी ही पार्टी के जीते पार्षद को दरकिनार करना, पर्दे के पीछे किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा तो नही?